Holi is a vibrant ancient Hindu festival, popularly known as the Festival of Colors, that celebrates the arrival of spring, love, and the victory of good over evil. Primarily observed in India and Nepal, it has grown into a global celebration of harmony and new beginnings.
Holi is celebrated on the full moon day (Purnima) of the Hindu month of Phalguna., वर्ष 2026 में, होली का त्योहार 4 मार्च, बुधवार को मनाया जाएगा।
Holi Ki मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं: Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
The gift of today's dreams(आज के सपनों का उपहार)
- होलिका दहन (छोटी होली): 3 मार्च 2026, मंगलवार
- शुभ मुहूर्त: शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
- धुलंडी (रंगों वाली Holi): 4 मार्च 2026, बुधवार
महत्वपूर्ण जानकारी: Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
- पूर्णिमा तिथि: 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे शुरू होगी और 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे समाप्त होगी।
- मथुरा और वृंदावन जैसे स्थानों पर उत्सव के कुछ दिन पहले से ही रौनक शुरू हो जाती है।
- Holika Dahan (Chhoti Holi): Tuesday, March 3, 2026.
- Rangwali Holi (Main Day): Wednesday, March 4, 2026.
Main Traditions & Celebrations Holi
- Holika Dahan: On the first eve, large bonfires are lit to symbolize the burning of the demoness Holika and the triumph of the devotee Prahlada. People sing and dance around the fire to let go of past grievances.
- Playing with Colors: The next day, people smear each other with dry colored powder (gulal) and drench one another with colored water using water guns (pichkaris) and balloons.
- Food and Drinks: Traditional delicacies include Gujiya (sweet dumplings), Puran Poli, and Dahi Vada. A special spiced milk drink called Thandai, often infused with bhang, is also customary.
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Significance and Legends : महत्व और किंवदंतियाँ
- Triumph of Good Over Evil: Derived from the legend of Prahlada, who survived a fire intended to kill him through his devotion to Lord Vishnu, while his aunt Holika perished.
- Divine Love: In the Braj region (Mathura and Vrindavan), it commemorates the love between Radha and Krishna. Legend says Krishna playfully colored Radha’s face to match his own, starting the tradition of applying colors to loved ones.
- Social Harmony: Holi is a day to forgive and forget, repairing broken relationships and ending conflicts. It bridges social gaps, as people of all ages and backgrounds celebrate together.
हैप्पी Holi की शुभकामनाएँ! इस रंगों के त्योहार पर, आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ, प्यार और समृद्धि आए; आपके सभी सपने पूरे हों और जीवन रंगों से भर जाए, यही हमारी कामना है। (Happy Holi! May this festival of colors bring lots of happiness, love, and prosperity to your life; may all your dreams come true and your life be filled with colors, this is our wish.)
Holi Ki कुछ और शुभकामनाएँ (Holi Some More Wishes):
आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं! यहाँ होली के लिए कुछ बेहतरीन शुभकामना संदेश दिए गए हैं:
Holi Ke छोटे और सुंदर संदेश: Short and sweet messages for Holi
- होली के रंगों की तरह आपकी जिंदगी भी खुशियों के रंगों से भरी रहे। Happy Holi 2026!
- प्यार, उमंग और हर्षोल्लास के इस पावन पर्व की आपको ढेरों बधाइयां।
- रंगों का त्योहार आपके जीवन में नई ऊर्जा और सफलता लेकर आए। शुभ होली!
शायराना अंदाज में Happy Holi :
- “निकलें गलियों में बना कर टोली,
भिगा दें आज हर एक की झोली,
कोई मुस्कुरा दे तो उसे गले लगा लो,
वरना कह दो बुरा न मानो होली है!” - “मथुरा की खुशबू, गोकुल का हार,
वृंदावन की सुगंध, बरसाने का प्यार,
मुबारक हो आपको होली का त्योहार!”
दोस्तों के लिए: Happy Holi
- खा के गुजिया, पी के भंग, लगा के थोड़ा-थोड़ा रंग, बजा के ढोलक और मृदंग, खेलें होली हम तेरे संग! Happy Holi!
आप अपनी पसंद के अनुसार Holi Wishes Images भी देख सकते हैं या सुंदर Holi Greeting Cards ऑनलाइन बना सकते हैं।
- होली की हार्दिक शुभकामनाएँ! रंगों का यह त्योहार आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए। (Happy Holi! May this festival of colors bring happiness, peace, and prosperity to your life.)
- रंगों का त्योहार है आया, खुशियों की बहार लाया। मुबारक हो आपको होली का त्योहार! (The festival of colors has arrived, bringing a spring of joy. Happy Holi!)
- होली मुबारक! ये जीवंत रंग आपके जीवन में उत्तम स्वास्थ्य और खुशियाँ लेकर आएं। (Happy Holi! May these vibrant colors bring good health and happiness to your life.)
- प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी, पिचकारी है स्नेह की, रंग दो हर दुनिया। Happy Holi! (Color the whole world with the color of love, the water gun is of affection, color every world. Happy Holi!)
- होली के रंग, अपनों के संग, खुशियों की सौगात, मस्ती के तरंग। आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ! (Colors of Holi, with loved ones, a gift of happiness, waves of fun. Hearty Holi wishes to you and your family!)
2026 की होली के लिए हिंदी में शुभकामनाएँ: “होली की हार्दिक शुभकामनाएँ! आपका जीवन इंद्रधनुष की तरह रंगीन और खुशियों से भरा रहे।” या “रंगों का यह त्योहार आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए। Happy Holi!”. आप अपने प्रियजनों को प्रेम, हंसी और यादगार पलों से भरी होली की शुभकामनाएँ भी भेज सकते हैं.
Holi Ki कुछ और शुभकामनाएँ (Holi More Wishes):
- रंगों का त्योहार: “रंगों की यह बहार आपके जीवन में खुशियों की बहार लाए। हैप्पी होली!”.
- प्यार और उल्लास: “आपको और आपके परिवार को प्यार, उमंग और खुशियों से भरी होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।”.
- सपनों की होली: “इस होली आपका हर सपना सच हो और जीवन रंगों से सराबोर हो जाए। होली मुबारक!”.
- मिठास और मस्ती: “गुलाल की खुशबू, मिठाइयों की मिठास, होली का त्योहार लाए आपके जीवन में खास। Happy Holi!”.
- खुशियों की बौछार: “इस होली आपके घर खुशियों की बौछार हो और जीवन में सुख-समृद्धि आए। होली की बधाई!”.
- प्रतीकात्मक: “होली का हर रंग आपके जीवन को नई उमंग और उत्साह से भर दे। होली की शुभकामनाएँ!”.
- सरल संदेश: “आपको और आपके प्रियजनों को एक शानदार और सुरक्षित होली की शुभकामनाएँ!”.
होली की शुभकामनाएं : Happy Holi
होली के खास मौके पर क्या भेजें सोच रहे हैं? यहां पाएं शानदार Happy Holi 2026 शुभकामनाएं और मैसेज हिंदी में दोस्तों, परिवार और प्रियजनों के लिए।
होली के बारे में About Holi
होली वह दिन है जब लोग सभी गिले-शिकवे भूलकर एक दूसरे के गले मिलते हैं। रंगों का यह त्योहार सभी के जीवन में रंग भरने वाला होता है। इस आर्टिकल में आप पाएंगे दिल छू लेने वाली होली की विशेस, रंग-बिरंगी शायरी, और बेहतरीन मैसेज जिन्हें आप दोस्तों और परिवार को भेज सकते हैं।
होली शुभकामना संदेश : Holi greetings message
होली, केवल एक रंगों का त्योहार नहीं है, यह प्रेम, भक्ति और आत्मीयता का पर्व है। यह त्योहार हमें हमारे सनातन धर्म की गहराईयों से जोड़ता है। यह भारतीय संस्कृति में रचे-बसे उन त्योहारों में से एक है, जो न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है, बल्कि मन और आत्मा को भी शुद्ध करता है।
इस पर्व की आध्यात्मिक जड़ें भगवान विष्णु और उनके परम भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ी हैं। जब प्रह्लाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यप के अन्याय के विरुद्ध धर्म और भक्ति की राह नहीं छोड़ी, तो भगवान ने उन्हें होलिका दहन के माध्यम से बचाया और यह सिद्ध किया कि सच्ची भक्ति और धर्म की विजय अवश्य होती है।
होली शुभकामना संदेश, जिन्हें आप अपने प्रियजनों को भेज सकते हैं : Holi greeting messages that you can send to your loved ones.
- होलिका दहन की तरह सारे कष्ट और क्लेश जल जाएं, और जीवन में नए रंग खिल उठें।
- राधा-कृष्ण के प्रेम की तरह, आपका जीवन भी रंगों से सराबोर हो जाए।
- भगवान विष्णु की कृपा से हो हर दिन मंगलमय – होली की शुभकामनाएं।
- प्रेम, भक्ति और उल्लास के रंगों से भरी हो आपकी होली।
- इस होली पर रिश्तों में नई मिठास और दिलों में नई उमंग हो।
- होली के हर रंग में छिपा हो एक नया आशीर्वाद।
- पिचकारी की धार हो, रंगों की बौछार हो – आपके जीवन में सदा बहार हो।
- प्रेम और अपनापन ही हो हर रंग की पहचान – यही होली की शान।
- गुलाल की तरह जीवन में भी हर दिन हो खूबसूरत।
- इस बार होली में राधा-कृष्ण का आशीर्वाद आपको मिले अपार।
- हर रंग के साथ जुड़ा हो एक नई उम्मीद का पैगाम।
- जीवन में सच्चाई और भक्ति के रंग कभी फीके न हों।
- राग-द्वेष भूलकर अपनाएं प्रेम का रास्ता – यही होली का संदेश है।
- रंगों के साथ-साथ आपके जीवन में तरक्की और ताजगी भी आए।
- बच्चों की हँसी, माँ के हाथ की मिठाइयाँ – होली हो सबसे प्यारा त्योहार।
- यह होली लाए आपके जीवन में खुशियों की नई लहर।
- दुखों को छोड़कर, चलिए रंगों में भीगें और मुस्कुराएं।
- प्रेम से रंगो, नफरत को धो डालो – यही है सच्ची होली।
- राधा रानी का आशीर्वाद बना रहे सदा – होली मुबारक।
- श्रीकृष्ण की बांसुरी की तरह मधुर हो जीवन।
- रंगों की मस्ती में हर चिंता खो जाए।
- होली का रंग ऐसा चढ़े कि जीवन में हर दिन उत्सव हो।
- इस होली पर मन के हर कोने को साफ करें, और नए सिरे से जुड़ें।
- पुराने रिश्तों को फिर से रंगने का यह पावन अवसर ना छोड़ें।
- सबको साथ लें, किसी को न छोड़ें – यही होली का असली रंग है।
- जीवन के हर कठिन मोड़ पर, रंगों की तरह उम्मीद जगती रहे।
- होली में मिलें ऐसे कि फिर कभी कोई दूरी न रहे।
Happy Holi wishes In English
Happy Holi wishes focus on spreading joy, love, and vibrant colors, with common themes including wishing for a life full of happiness, prosperity, and new beginnings, urging people to celebrate with love and forget worries, and hoping the festival brings peace and good health, all expressed through colorful metaphors like rainbows and vibrant hues.
Holi Short & Sweet Wishes
- Happy Holi! May your life be as colorful as the rainbow.
- Wishing you a Holi filled with love, laughter, and bright colors!.
- May the colors of Holi bring you joy, peace, and prosperity. Happy Holi!.
- Enjoy the festival of colors! Happy Holi!.
Holi Heartfelt & Meaningful Wishes
- May this Holi paint your life with the vibrant hues of love, joy, and success. Happy Holi!.
- Let the colors of Holi spread happiness, peace, and harmony in your life. Happy Holi to you and your family!.
- Wishing you a Holi filled with fun, sweets, and unforgettable colorful memories with your loved ones.
- May the festival of colors wash away all your worries and fill your life with positivity and new beginnings. Happy Holi!.
Holi Wishes for Friends & Family
- Happy Holi to my wonderful family! May our home be filled with joy and prosperity.
- Sending warm wishes and hugs to the best family! Enjoy this Holi to the fullest.
- May the colors of Holi bring you and your family good health, success, and happiness.
- Let’s celebrate togetherness and paint the canvas of friendship with joy! Happy Holi, my friend!.
होली केवल एक त्यौहार नहीं, यह आत्मा को पवित्र करने का एक अवसर है।, Holi is not just a festival; it is an opportunity to purify the soul.
होली केवल एक त्यौहार नहीं, यह आत्मा को पवित्र करने का एक अवसर है। यह हमें यह याद दिलाने आता है कि भक्ति से बड़ा कोई अस्त्र नहीं, प्रेम से सुंदर कोई रंग नहीं और अपनापन ही सबसे गहरी पहचान है। इस होली पर ईश्वर से यही प्रार्थना है कि हमारे मनों में भक्ति बनी रहे, रिश्तों में विश्वास बना रहे और जीवन हर दिन एक उत्सव बने।
आप और आपका परिवार सदा रंगों, प्रेम और समृद्धि से भरा रहे – होली की अनंत शुभकामनाएं!
होली कैसे मनाई जाती है : How is Holi celebrated?
होली मुख्य रूप से दो दिनों में मनाई जाती है: पहले दिन होलिका दहन (बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक) के लिए लकड़ियों का ढेर जलाया जाता है और दूसरे दिन रंगों की होली, जहाँ लोग एक-दूसरे पर गुलाल और रंगीन पानी फेंकते हैं, नाचते-गाते हैं, मिठाई खाते हैं और सभी भेदभाव भुलाकर एकजुटता व खुशियाँ मनाते हैं। इसमें पिचकारियाँ, रंग-बिरंगे पाउडर और पारंपरिक पकवान (जैसे गुजिया) शामिल होते हैं, जो प्रेम और नई फसल के आगमन का प्रतीक है।
होली मनाने के मुख्य तरीके: Main ways to celebrate Holi
- होलिका दहन (पहला दिन):
- शाम को बुराई के प्रतीक के रूप में बड़ी आग जलाई जाती है।
- लोग अलाव के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, प्रार्थना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
- रंगों की होली (दूसरा दिन – धुलेंडी):
- रंग लगाना: लोग एक-दूसरे के चेहरे पर रंगीन पाउडर (गुलाल) और पानी फेंकते हैं।
- पिचकारी और पानी: पिचकारियों से रंगीन पानी उड़ाया जाता है, और कई जगहों पर पानी की बाल्टियों से भी लोग नहाते हैं।
- संगीत और नृत्य: लोग ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते-गाते हैं।
- मिठाई और पकवान: घर-घर में स्वादिष्ट मिठाइयाँ (जैसे गुजिया) और स्नैक्स बनाए जाते हैं, जिन्हें एक-दूसरे के साथ बांटा जाता है।
- मिलना-जुलना: लोग दोस्त, रिश्तेदार और पड़ोसियों के घर जाते हैं, रंग लगाते हैं और होली की शुभकामनाएँ देते हैं।
- एकता का प्रतीक: यह दिन अमीरी-गरीबी, छोटे-बड़े का भेद भुलाकर सभी को एक साथ लाता है और प्रेम, दोस्ती का संदेश देता है।
Holi Ki अन्य परंपराएं:
- बिहार/झारखंड में: इसे ‘फगुवा’ कहते हैं और बड़ों के पैरों पर रंग लगाकर आशीर्वाद लिया जाता है।
- पश्चिमी भारत (जैसे राजस्थान, गोवा): यहाँ लोकनृत्य और संगीत के साथ ‘दोल पूर्णिमा’ या ‘शिमगो’ उत्सव भी मनाया जाता है।
संक्षेप में, होली रंगों, खुशियों और एकजुटता का त्योहार है, जिसमें बुराई का अंत और प्रेम का उल्लास मनाया जाता है।
होली मनाने का क्या कारण है? What is the reason for celebrating Holi?
होली मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत (होलिका-प्रह्लाद कथा), भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम, और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जो रंगों, संगीत और उल्लास के साथ मनाया जाता है, सामाजिक भेदभाव मिटाकर सभी को एकजुट करता है और नए जीवन व ऊर्जा का संचार करता है।
होली मनाने के प्रमुख कारण: The main reasons for celebrating Holi
- होलिका दहन और प्रह्लाद की कथा (बुराई पर अच्छाई की विजय): हिरण्यकशिपु नामक राक्षस ने अपने पुत्र प्रह्लाद (जो विष्णु भक्त था) को मारने की कोशिश की। अपनी बहन होलिका (जिसे आग से न जलने का वरदान था) की गोद में बिठाकर आग लगवा दी, लेकिन विष्णु कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
- कृष्ण-राधा का प्रेम: राधा और कृष्ण के प्रेम-लीलाओं से भी होली जुड़ी है। फाल्गुन मास में कृष्ण और गोप-गोपियों के साथ रंग खेलते थे, जिसे आज भी बरसाने की लठमार होली के रूप में मनाया जाता है।
- वसंत ऋतु का स्वागत: यह त्योहार प्रकृति में बदलाव, वसंत के आगमन, नई फसल और ऊर्जा का उत्सव है, जो सर्दियों को अलविदा कहता है।
- सामाजिक एकता: होली पर लोग जाति, धर्म, उम्र के भेदभाव भूलकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, गले मिलते हैं और प्रेम-सौहार्द बढ़ाते हैं, जिससे समाज में एकता आती है।
कैसे मनाते हैं: How is Holi celebrated?
- होलिका दहन: बुराई के प्रतीक होलिका को जलाने की परंपरा होती है, जो अलाव जलाकर की जाती है।
- रंग खेलना: अगले दिन लोग एक-दूसरे पर रंग-बिरंगे गुलाल और पानी फेंकते हैं।
- पारंपरिक गीत और नृत्य: लोग नाचते-गाते हैं और मिठाइयाँ खाते हैं।
कुल मिलाकर, होली एक ऐसा पर्व है जो बुराई का अंत, प्रेम की जीत और प्रकृति के सौंदर्य का संदेश देता है।
होली किस जाति की थी? What caste did Holi belong to?
होलिका ( संस्कृत : होलिका , IAST : होलिका ), जिसे सिंहिका के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक असुरी है। वह असुर-राजा हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष की बहन और प्रह्लाद की बुआ है। होलिका दहन (होलिका दहन) की कथा पाप पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
होलिका के पति कौन थे? Who was Holika’s husband?
| होलिका | |
|---|---|
| माता-पिता | दिति (माता) , कश्यप (पिता) |
| सहोदर | हिरण्याक्ष व हिरण्यकसिपु |
| जीवनसाथी | वप्रीचिति |
| संतान | स्वरभानु |
होलिका प्रहलाद को क्यों जलाना चाहती थी? Why did Holika want to burn Prahlada?
अहंकार से अंधा होकर हिरण्यकशिपु ने विष्णु की पूजा पर प्रतिबंध लगा दिया। उसका पुत्र प्रहलाद महाराज, जो विष्णु का कट्टर भक्त था, ने आज्ञा का पालन करने से इनकार कर दिया। क्रोधित होकर राजा ने अपनी बहन होलिका को, जो अग्नि से अप्रभावित थी, प्रहलाद को जलाने का आदेश दिया । परन्तु भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की और होलिका नष्ट हो गई।
होली के देवता कौन थे? Who was the god of Holi?
होलिका दहन को लेकर हिंदू धर्म में कई कथाएं प्रचलित हैं. इसमें सबसे प्रचलित कथा विष्णु भगवान के भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की बहन होलिका से जुड़ी है. पौराणिक कथा के अनुसार राक्षस हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद, विष्णु भगवान का परम भक्त था
होली का इतिहास क्या है? What is the history of Holi?
इसके अतिरिक्त, यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, क्योंकि यह नरसिंह विष्णु द्वारा हिरण्यकशिपु पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाता है। होली की उत्पत्ति भारतीय उपमहाद्वीप में हुई और यहीं मुख्य रूप से मनाई जाती है, लेकिन भारतीय प्रवासियों के माध्यम से यह एशिया के अन्य क्षेत्रों और पश्चिमी दुनिया के कुछ हिस्सों में भी फैल गई है ।
होलिका बहन किस राक्षस की थी?
होलिका एक राक्षसी थी और राक्षस राजा हिरण्यकश्यप की बहन थी। हिरण्यकश्यप स्वयं को ब्रह्मांड का स्वामी और सभी देवताओं से श्रेष्ठ मानता था। प्रहलाद राजा का पुत्र था।
प्रहलाद और होलिका की कहानी – होली का त्योहार
यह होली की मुख्य कहानी है। होलिका एक राक्षसी थी, और
राक्षस राजा हिरण्यकश्यप की बहन थी। हिरण्यकश्यप
खुद को ब्रह्मांड का शासक और सभी देवताओं से बड़ा मानता था।
प्रहलाद राजा का बेटा था। उसके पिता उससे नफरत करते थे क्योंकि प्रहलाद
भगवान विष्णु का सच्चा भक्त था।
एक दिन राजा ने उससे पूछा, “सबसे महान कौन है, भगवान या मैं?”
बेटे ने कहा, “भगवान हैं, तुम तो बस एक राजा हो।”
राजा बहुत गुस्सा हुआ और उसने अपने बेटे को मारने का फैसला किया।
लेकिन राजा की मारने की कोशिशें ज़्यादा काम नहीं आईं। प्रहलाद
चट्टान से फेंके जाने, हाथियों द्वारा कुचले जाने,
सांपों द्वारा काटे जाने और सैनिकों द्वारा हमला किए जाने के बाद भी बच गया।
इसलिए राजा ने अपनी बहन होलिका से लड़के को मारने के लिए कहा।
होलिका ने प्रहलाद को पकड़ा और लड़के को अपनी गोद में लेकर आग के बीच में बैठ गई।
होलिका को देवताओं से एक जादुई शक्ति मिली थी जिससे वह
आग से सुरक्षित थी, इसलिए उसने सोचा कि यह एक बहुत अच्छी योजना है, और
प्रहलाद जलकर मर जाएगा जबकि वह सुरक्षित रहेगी।
लेकिन देवताओं के तोहफों को हल्के में लेना कभी भी समझदारी नहीं है! क्योंकि होलिका
अपनी शक्ति का इस्तेमाल कुछ बुरा करने के लिए कर रही थी, उसकी शक्ति खत्म हो गई और वह
जलकर राख हो गई। प्रहलाद अपने भगवान विष्णु के प्रति सच्चा रहा, और
अपनी राक्षसी चाची की गोद में प्रार्थना करता रहा। विष्णु ने उसकी रक्षा की, और
प्रहलाद बच गया।
कुछ ही समय बाद, विष्णु ने राजा हिरण्यकश्यप को मार डाला और प्रहलाद
अपने पिता की जगह एक बुद्धिमान राजा के रूप में शासन करने लगा।
Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है।
Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है।
रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं। दूसरे दिन, जिसे प्रमुखतः धुलेंडी व धुरड्डी, धुरखेल या धूलिवंदन इसके अन्य नाम हैं, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं।
होली की रात परी साधना का विशेष महत्व है, इसे धन प्राप्ति और संतान पर मौजूद किसी भी शक्ति की सवारी को उतारने के लिए किया जाता है। राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है।
राग अर्थात संगीत और रंग तो इसके प्रमुख अंग हैं ही पर इनको उत्कर्ष तक पहुँचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्यौहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है।
इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है।
गुझिया होली का प्रमुख पकवान है जो कि मावा (खोया) और मैदा से बनती है और मेवाओं से युक्त होती है इस दिन कांजी के बड़े खाने व खिलाने का भी रिवाज है। नए कपड़े पहन कर होली की शाम को लोग एक दूसरे के घर होली मिलने जाते है जहाँ उनका स्वागत गुझिया,नमकीन व ठंडाई से किया जाता है। होली के दिन आम्र मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का बड़ा माहात्म्य है।
होली इतिहास क्या है
होली भारत का अत्यंत प्राचीन पर्व है जो होली, होलिका या होलाका नाम से मनाया जाता था। वसंत की ऋतु में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने के कारण इसे वसंतोत्सव और काम-महोत्सव भी कहा गया है।
इतिहासकारों का मानना है कि आर्यों में भी इस पर्व का प्रचलन था लेकिन अधिकतर यह पूर्वी भारत में ही मनाया जाता था। इस पर्व का वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकों में मिलता है। इनमें प्रमुख हैं, जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र। नारद पुराण औऱ भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों और ग्रंथों में भी इस पर्व का उल्लेख मिलता है। विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से ३०० वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है। संस्कृत साहित्य में वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव अनेक कवियों के प्रिय विषय रहे हैं।
सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है। भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं मुसलमान भी मनाते हैं। सबसे प्रामाणिक इतिहास की तस्वीरें हैं मुगल काल की और इस काल में होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं। अकबर का जोधाबाई के साथ तथा जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहाँगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है।
शाहजहाँ के समय तक होली खेलने का मुग़लिया अंदाज़ ही बदल गया था। इतिहास में वर्णन है कि शाहजहाँ के ज़माने में होली को ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था। अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के बारे में प्रसिद्ध है कि होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाने जाया करते थे। मध्ययुगीन हिन्दी साहित्य में दर्शित कृष्ण की लीलाओं में भी होली का विस्तृत वर्णन मिलता है।
इसके अतिरिक्त प्राचीन चित्रों, भित्तिचित्रों और मंदिरों की दीवारों पर इस उत्सव के चित्र मिलते हैं। विजयनगर की राजधानी हंपी के १६वी शताब्दी के एक चित्रफलक पर होली का आनंददायक चित्र उकेरा गया है। इस चित्र में राजकुमारों और राजकुमारियों को दासियों सहित रंग और पिचकारी के साथ राज दम्पत्ति को होली के रंग में रंगते हुए दिखाया गया है। १६वी शताब्दी की अहमदनगर की एक चित्र आकृति का विषय वसंत रागिनी ही है। इस चित्र में राजपरिवार के एक दंपत्ति को बगीचे में झूला झूलते हुए दिखाया गया है। साथ में अनेक सेविकाएँ नृत्य-गीत व रंग खेलने में व्यस्त हैं।
वे एक दूसरे पर पिचकारियों से रंग डाल रहे हैं। मध्यकालीन भारतीय मंदिरों के भित्तिचित्रों और आकृतियों में होली के सजीव चित्र देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इसमें १७वी शताब्दी की मेवाड़ की एक कलाकृति में महाराणा को अपने दरबारियों के साथ चित्रित किया गया है। शासक कुछ लोगों को उपहार दे रहे हैं, नृत्यांगना नृत्य कर रही हैं और इस सबके मध्य रंग का एक कुंड रखा हुआ है। बूंदी से प्राप्त एक लघुचित्र में राजा को हाथीदाँत के सिंहासन पर बैठा दिखाया गया है जिसके गालों पर महिलाएँ गुलाल मल रही हैं।
होली की कहानियाँ
होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की। माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। अपने बल के अहंकार में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी।
हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती।
हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गया। ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है। प्रतीक रूप से यह भी माना जाता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है।
होलिका दहन की मुख्य कथा
होली से सम्बन्धित मुख्य कथा के अनुसार एक नगर में हिरण्यकश्यप नाम का दानव राजा रहता था। वह सभी को अपनी पूजा करने को कहता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का उपासक भक्त था। हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को बुलाकर राम का नाम न जपने को कहा तो प्रहलाद ने स्पष्ट रूप से कहा, पिताजी! परमात्मा ही समर्थ है। प्रत्येक कष्ट से परमात्मा ही बचा सकता है। मानव समर्थ नहीं है। यदि कोई भक्त साधना करके कुछ शक्ति परमात्मा से प्राप्त कर लेता है तो वह सामान्य व्यक्तियों में तो उत्तम हो जाता है, परंतु परमात्मा से उत्तम नहीं हो सकता।<
यह बात सुनकर अहंकारी हिरण्यकश्यप क्रोध से लाल पीला हो गया और नौकरों सिपाहियों से बोला कि इसको ले जाओ मेरी आँखों के सामने से और जंगल में सर्पों में डाल आओ। सर्प के डसने से यह मर जाएगा। ऐसा ही किया गया। परंतु प्रहलाद मरा नहीं, क्योंकि सर्पों ने डसा नहीं।
प्रह्लाद की कथा के अतिरिक्त यह पर्व राक्षसी ढुंढी, राधा कृष्ण के रास और कामदेव के पुनर्जन्म से भी जुड़ा हुआ है। कुछ लोगों का मानना है कि होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग शिव के गणों का वेश धारण करते हैं तथा शिव की बारात का दृश्य बनाते हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था। इसी खु़शी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था।
होली की परंपराएँ : Holi 2026 Date, Happy Holi Wishes In Hindi
होली के पर्व की तरह इसकी परंपराएँ भी अत्यंत प्राचीन हैं और इसका स्वरूप और उद्देश्य समय के साथ बदलता रहा है। प्राचीन काल में यह विवाहित महिलाओं द्वारा परिवार की सुख समृद्धि के लिए मनाया जाता था और पूर्ण चंद्र की पूजा करने की परंपरा थी। वैदिक काल में इस पर्व को नवात्रैष्टि यज्ञ कहा जाता था।
उस समय खेत के अधपके अन्न को यज्ञ में दान करके प्रसाद लेने का विधान समाज में व्याप्त था। अन्न को होला कहते हैं, इसी से इसका नाम होलिकोत्सव पड़ा। भारतीय ज्योतिष के अनुसार चैत्र शुदी प्रतिपदा के दिन से नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है। इस उत्सव के बाद ही चैत्र महीने का आरंभ होता है। अतः यह पर्व नवसंवत का आरंभ तथा वसंतागमन का प्रतीक भी है। इसी दिन प्रथम पुरुष मनु का जन्म हुआ था, इस कारण इसे मन्वादितिथि कहते हैं।
एक अन्य कथा के अनुसार त्रेतायुग की शुरुआत में भगवन विष्णु जी ने धूलि का वंदन किया था। इसलिए होली के इस त्यौहार को धुलेंडी के नाम से भी मनाया जाता है। धुलेंडी होली के अगले दिन मनाया जाता है जिसमें लोग एक दूसरे पर धुल और कीचड़ लगाते हैं और इसे धूल स्नान कहा जाता है।
होली का पहला काम झंडा या डंडा गाड़ना होता है। इसे किसी सार्वजनिक स्थल या घर के आहाते में गाड़ा जाता है। इसके पास ही होलिका की अग्नि इकट्ठी की जाती है। होली से काफ़ी दिन पहले से ही यह सब तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। पर्व का पहला दिन होलिका दहन का दिन कहलाता है। इस दिन चौराहों पर व जहाँ कहीं अग्नि के लिए लकड़ी एकत्र की गई होती है, वहाँ होली जलाई जाती है। इसमें लकड़ियाँ और उपले प्रमुख रूप से होते हैं। कई स्थलों पर होलिका में भरभोलिए जलाने की भी परंपरा है।
भरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं जिनके बीच में छेद होता है। इस छेद में मूँज की रस्सी डाल कर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं। होली में आग लगाने से पहले इस माला को भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर फेंक दिया जाता है। रात को होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है। इसका यह आशय है कि होली के साथ भाइयों पर लगी बुरी नज़र भी जल जाए। लकड़ियों व उपलों से बनी इस होली का दोपहर से ही विधिवत पूजन आरंभ हो जाता है।
घरों में बने पकवानों का यहाँ भोग लगाया जाता है। दिन ढलने पर ज्योतिषियों द्वारा निकाले मुहूर्त पर होली का दहन किया जाता है। इस आग में नई फसल की गेहूँ की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है। होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है। यह बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का सूचक है। गाँवों में लोग देर रात तक होली के गीत गाते हैं तथा नाचते हैं।
होली से अगला दिन धूलिवंदन कहलाता है। इस दिन लोग रंगों से खेलते हैं। सुबह होते ही सब अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने निकल पड़ते हैं। गुलाल और रंगों से सबका स्वागत किया जाता है। लोग अपनी ईर्ष्या-द्वेष की भावना भुलाकर प्रेमपूर्वक गले मिलते हैं तथा एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। इस दिन जगह-जगह टोलियाँ रंग-बिरंगे कपड़े पहने नाचती-गाती दिखाई पड़ती हैं। बच्चे पिचकारियों से रंग छोड़कर अपना मनोरंजन करते हैं। सारा समाज होली के रंग में रंगकर एक-सा बन जाता है। रंग खेलने के बाद देर दोपहर तक लोग नहाते हैं और शाम को नए वस्त्र पहनकर सबसे मिलने जाते हैं। प्रीति भोज तथा गाने-बजाने के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
होली के दिन घरों में खीर, पूरी और पूड़े आदि विभिन्न व्यंजन (खाद्य पदार्थ) पकाए जाते हैं। इस अवसर पर अनेक मिठाइयाँ बनाई जाती हैं जिनमें गुझियों का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। बेसन के सेव और दहीबड़े भी सामान्य रूप से उत्तर प्रदेश में रहने वाले हर परिवार में बनाए व खिलाए जाते हैं। कांजी, भांग और ठंडाई इस पर्व के विशेष पेय होते हैं। पर ये कुछ ही लोगों को भाते हैं। इस अवसर पर उत्तरी भारत के प्रायः सभी राज्यों के सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहता है, पर दक्षिण भारत में उतना लोकप्रिय न होने की वज़ह से इस दिन सरकारी संस्थानों में अवकाश नहीं रहता।
होली एक विशिष्ट उत्सव : Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में भिन्नता के साथ मनाया जाता है। ब्रज की होली आज भी सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। बरसाने की लठमार होली काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ उन्हें लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। इसी प्रकार मथुरा और वृंदावन में भी १५ दिनों तक होली का पर्व मनाया जाता है। कुमाऊँ की गीत बैठकी में शास्त्रीय संगीत की गोष्ठियाँ होती हैं। यह सब होली के कई दिनों पहले शुरू हो जाता है। हरियाणा की धुलंडी में भाभी द्वारा देवर को सताए जाने की प्रथा है।
बंगाल की दोल जात्रा चैतन्य महाप्रभु के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। जलूस निकलते हैं और गाना बजाना भी साथ रहता है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र की रंग पंचमी में सूखा गुलाल खेलने, गोवा के शिमगो में जलूस निकालने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा पंजाब के होला मोहल्ला में सिक्खों द्वारा शक्ति प्रदर्शन की परंपरा है।
तमिलनाडु की कमन पोडिगई मुख्य रूप से कामदेव की कथा पर आधारित वसंतोतसव है जबकि मणिपुर के याओसांग में योंगसांग उस नन्हीं झोंपड़ी का नाम है जो पूर्णिमा के दिन प्रत्येक नगर-ग्राम में नदी अथवा सरोवर के तट पर बनाई जाती है। दक्षिण गुजरात के आदिवासियों के लिए होली सबसे बड़ा पर्व है,
छत्तीसगढ़ की होरी में लोक गीतों की अद्भुत परंपरा है और मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है भगोरिया, जो होली का ही एक रूप है।
बिहार का फगुआ जम कर मौज मस्ती करने का पर्व है और नेपाल की होली में इस पर धार्मिक व सांस्कृतिक रंग दिखाई देता है। इसी प्रकार विभिन्न देशों में बसे प्रवासियों तथा धार्मिक संस्थाओं जैसे इस्कॉन या वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में अलग अलग प्रकार से होली के शृंगार व उत्सव मनाने की परंपरा है जिसमें अनेक समानताएँ और भिन्नताएँ हैं।
आधुनिक काल में होली का त्योहार : Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
होली रंगों का त्योहार है, हँसी-खुशी का त्योहार है, लेकिन होली के भी अनेक रूप देखने को मिलते हैं। प्राकृतिक रंगों के स्थान पर रासायनिक रंगों का प्रचलन, भांग-ठंडाई की जगह नशेबाजी और लोक संगीत की जगह फ़िल्मी गानों का प्रचलन इसके कुछ आधुनिक रूप हैं।
लेकिन इससे होली पर गाए-बजाए जाने वाले ढोल, मंजीरों, फाग, धमार, चैती और ठुमरी की शान में कमी नहीं आती। अनेक लोग ऐसे हैं जो पारंपरिक संगीत की समझ रखते हैं और पर्यावरण के प्रति सचेत हैं। इस प्रकार के लोग और संस्थाएँ चंदन, गुलाबजल, टेसू के फूलों से बना हुआ रंग तथा प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की परंपरा को बनाए हुए हैं, साथ ही इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान भी दे रहे हैं।
रासायनिक रंगों के कुप्रभावों की जानकारी होने के बाद बहुत से लोग स्वयं ही प्राकृतिक रंगों की ओर लौट रहे हैं।
होली की लोकप्रियता का विकसित होता हुआ अंतर्राष्ट्रीय रूप भी आकार लेने लगा है। बाज़ार में इसकी उपयोगिता का अंदाज़ इस साल होली के अवसर पर एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठान केन्ज़ोआमूर द्वारा जारी किए गए नए इत्र होली है से लगाया जा सकता है
प्रचलित संस्कृति में होली का त्यौहार
साहित्य : Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
प्राचीन काल के संस्कृत साहित्य में होली के अनेक रूपों का विस्तृत वर्णन है। श्रीमद्भागवत महापुराण में रसों के समूह रास का वर्णन है। अन्य रचनाओं में ‘रंग’ नामक उत्सव का वर्णन है जिनमें हर्ष की प्रियदर्शिका व रत्नावली तथा कालिदास की कुमारसंभवम् तथा मालविकाग्निमित्रम् शामिल हैं। कालिदास रचित ऋतुसंहार में पूरा एक सर्ग ही ‘वसन्तोत्सव’ को अर्पित है। भारवि, माघ और अन्य कई संस्कृत कवियों ने वसन्त की खूब चर्चा की है। चंद बरदाई द्वारा रचित हिंदी के पहले महाकाव्य पृथ्वीराज रासो में होली का वर्णन है। भक्तिकाल और रीतिकाल के हिन्दी साहित्य में होली और फाल्गुन माह का विशिष्ट महत्व रहा है। आदिकालीन कवि विद्यापति से लेकर भक्तिकालीन सूरदास, रहीम, रसखान, पद्माकर
जायसी, मीराबाई, कबीर और रीतिकालीन बिहारी, केशव, घनानंद आदि अनेक कवियों को यह विषय प्रिय रहा है। महाकवि सूरदास ने वसन्त एवं होली पर 78 पद लिखे हैं। पद्माकर ने भी होली विषयक प्रचुर रचनाएँ की हैं।
इस विषय के माध्यम से कवियों ने जहाँ एक ओर नितान्त लौकिक नायक नायिका के बीच खेली गई अनुराग और प्रीति की होली का वर्णन किया है, वहीं राधा कृष्ण के बीच खेली गई प्रेम और छेड़छाड़ से भरी होली के माध्यम से सगुण साकार भक्तिमय प्रेम और निर्गुण निराकार भक्तिमय प्रेम का निष्पादन कर डाला है।
सूफ़ी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, अमीर खुसरो और बहादुर शाह ज़फ़र जैसे मुस्लिम संप्रदाय का पालन करने वाले कवियों ने भी होली पर सुंदर रचनाएँ लिखी हैं जो आज भी जन सामान्य में लोकप्रिय हैं।
आधुनिक हिंदी कहानियों प्रेमचंद की राजा हरदोल, प्रभु जोशी की अलग अलग तीलियाँ, तेजेंद्र शर्मा की एक बार फिर होली, ओम प्रकाश अवस्थी की होली मंगलमय हो तथा स्वदेश राणा की हो ली में होली के अलग अलग रूप देखने को मिलते हैं। भारतीय फ़िल्मों में भी होली के दृश्यों और गीतों को सुंदरता के साथ चित्रित किया गया है। इस दृष्टि से शशि कपूर की उत्सव, यश चोपड़ा की सिलसिला, वी शांताराम की झनक झनक पायल बाजे और नवरंग इत्यादि उल्लेखनीय हैं।
होली के संगीत : Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
भारतीय शास्त्रीय, उपशास्त्रीय, लोक तथा फ़िल्मी संगीत की परम्पराओं में होली का विशेष महत्व है। शास्त्रीय संगीत में धमार का होली से गहरा संबंध है, हालाँकि ध्रुपद, धमार, छोटे व बड़े ख्याल और ठुमरी में भी होली के गीतों का सौंदर्य देखते ही बनता है। कथक नृत्य के साथ होली, धमार और ठुमरी पर प्रस्तुत की जाने वाली अनेक सुंदर बंदिशें जैसे चलो गुंइयां आज खेलें होरी कन्हैया घर आज भी अत्यंत लोकप्रिय हैं। ध्रुपद में गाये जाने वाली एक लोकप्रिय बंदिश है खेलत हरी संग सकल, रंग भरी होरी सखी।
भारतीय शास्त्रीय संगीत में कुछ राग ऐसे हैं जिनमें होली के गीत विशेष रूप से गाए जाते हैं। बसंत, बहार, हिंडोल और काफ़ी ऐसे ही राग हैं। होली पर गाने बजाने का अपने आप वातावरण बन जाता है और जन जन पर इसका रंग छाने लगता है। उपशास्त्रीय संगीत में चैती, दादरा और ठुमरी में अनेक प्रसिद्ध होलियाँ हैं। होली के अवसर पर संगीत की लोकप्रियता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि संगीत की एक विशेष शैली का नाम ही होली है,
जिसमें अलग अलग प्रांतों में होली के विभिन्न वर्णन सुनने को मिलते है जिसमें उस स्थान का इतिहास और धार्मिक महत्व छुपा होता है। जहाँ ब्रजधाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के जैसे होली खेलें रघुवीरा अवध में। राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली का विशेष रंग है। उनकी एक प्रसिद्ध होली है आज रंग है री मन रंग है, अपने महबूब के घर रंग है री।
इसी प्रकार शंकर जी से संबंधित एक होली में दिगंबर खेले मसाने में होली कह कर शिव द्वारा श्मशान में होली खेलने का वर्णन मिलता है। भारतीय फिल्मों में भी अलग अलग रागों पर आधारित होली के गीत प्रस्तुत किये गए हैं जो काफी लोकप्रिय हुए हैं। ‘सिलसिला’ के गीत रंग बरसे भीगे चुनर वाली, रंग बरसे और ‘नवरंग’ के आया होली का त्योहार, उड़े रंगों की बौछार, को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं।
होली के त्यौहार पर रंगों का उपयोग : Holi 2026 Date, Holi Kab Hai, Happy Holi Wishes In Hindi
प्राचीन काल में लोग चन्दन और गुलाल से ही होली खेलते थे। समय के साथ इनमें भी बदलाव देखने को मिला है। कई लोगों द्वारा प्राकृतिक रंगों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे त्वचा या आँखों पर किसी भी प्रकार का कुप्रभाव न पड़े।
टीवी9 भारतवर्ष द्वारा घर पर होली के रंग बनाने एवं रासायनिक रंगों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
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